मूत्र में पित्त लवण की जांच

हमारा उद्देश्य:

हमारा उद्देश्य मूत्र में पित्त लवण की उपस्थिति का पता लगाना है।

सिद्धांत

पित्त पीला-हरा तरल पदार्थ होता है जिसमें पानी और कोलेस्ट्रॉल, पित्त अम्ल, और बिलीरुबिन जैसे जैविक अणु होते हैं। मनुष्यों  में, पित्त के दो मुख्य कार्य वसा का पाचन और अवशोषण और पित्त में स्राव करके शरीर से पित्त लवण नष्ट करना है।

मनुष्यों  और अधिकांश रीढ़युक्तू जीवों में, पित्त का निर्माण लीवर करता है। पित्त लवण का निर्माण लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के साथ शुरू होता है। मैक्रोफेज लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन को तोड़ देता है और हीम घटक से आयरन को निकाल देता है। हीम का आयरन मुक्त भाग हरे वर्णक बाइलीवरडिन और उसके बाद पीले नारंगी वर्णक बिलिरूबिन में बदल जाता है। लीवर में, पित्त वर्णक के रूप में बिलिरूबिन पित्त में स्रावित होता है जो पहले छोटी आंत में जाता है और उसके बाद बड़ी आंत में जाता है। केवल कुछ विशेष रोग की स्थितियों में मूत्र में बिलीरुबिन का पता चलता है। बिलीरुबिन मूत्र में नहीं पाया जाता है। यह पीलिया के दौरान या लीवर की क्षति के कारण मूत्र में आता है।

हम स्मिथ अभिकर्मक और पेट्टेनकोफर परीक्षण का प्रयोग कर मूत्र में पित्त लवण की उपस्थिति का परीक्षण कर सकते हैं। स्मिथ अभिकर्मक में मूत्र मिलाने पर,  मूत्र में पित्त लवण की उपस्थिति में हरे रंग का छल्ला बन जाता है। पेट्टेनकोफर परीक्षण पित्त लवण की उपस्थिति में लाल रंग देता है।

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