श्वसन की दर

हमारा उद्देश्य

गेहूं (कार्बोहाइड्रेट) सरसों (वसा) और सेम (प्रोटीन) जैसे अलग-अलग तत्वों वाले अंकुरित हो रहे बीजों में श्वसन की दर का अध्ययन करना।

सिद्धांत

श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज जैसे सरल कार्बोहाइड्रेट सरल पदार्थों में टूट जाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा मुक्त करते हैं। श्वसन के दौरान प्रयुक्त या ऑक्सीकृत यौगिक श्वसन सब्सट्रेट कहलाते हैं। कार्बोहाइड्रेट वसा और प्रोटीन श्वसन सब्सट्रेट के उदाहरण हैं और इनमें कार्बोहाइड्रेट मुख्य  श्वसन सब्सट्रेट हैं। श्वसन की दर गैस विनिमय यानी श्वसन  सब्सट्रेट ऑक्सीजन की खपत या कार्बन डाइऑक्साइड के निर्माण के रूप में मापा जा सकता है।

श्वसन भागफल क्या है?

जैसाकि हम जानते हैं, एरोबिक श्वसन के दौरान, ऑक्सीजन का उपभोग होता है और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है। श्वसन भागफल (RQ) जब भोजन का उपापचय हो रहा होता है उपभोग होने वाली O2 से  उत्पन्न होने वाली CO2 का अनुपात होता है।

चलिए देखते हैं कि श्वसन भागफल विभिन्न श्वसन पदार्थों पर कैसे निर्भर करता है।

श्वसन भागफल श्वसन के दौरान उपयोग में आने वाले श्वसन सब्सट्रेट के प्रकार पर निर्भर करता है। विभिन्न श्वसन सब्सट्रेटों के अणुओं में अलग- अलग संख्या में कार्बन और ऑक्सीजन के परमाणु होते हैं। इसलिए श्वसन के दौरान सब्सट्रेट के प्रति ग्राम भार से उत्पन्न होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी अलग-अलग होती है। कार्बोहाइड्रेट के अणुओं में बराबर संख्या में कार्बन और ऑक्सीजन होता है। जब कार्बोहाइड्रेट का सब्सट्रेट के रूप में उपयोग होता है तो RQ 1 होता है क्योंकि बराबर मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का निर्माण और उपभोग होता है।

वसा और प्रोटीन के अणुओं में ऑक्सीजन परमाणु और कार्बन परमाणु छोटी संख्या में होते हैं। जब श्वसन में वसा का उपयोग सब्सट्रेट के रूप में होता है, तो RQ 1 से कम होता है क्योंकि उपयोग में आने वाली ऑक्सीजन की मात्रा मुक्त  होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा की तुलना में हमेशा अधिक होती है।.

इस प्रकार, हम सब्सट्रेट के प्रति ग्राम वजन से उत्पन्न  होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा की गणना करके विभिन्न श्वसन सब्सट्रेटो के लिए श्वसन की दर का अध्ययन कर सकते हैं।

चलिए श्वसन की दर को प्रभावित करने वाले कारकों को देखते हैं।

श्वसन की दर को प्रभावित करने वाले कुछ कारक यहाँ दिए जा रहे हैं।

●       तापमान: बहुत ज्यादा तापमान पर, श्वसन की दर समय के साथ कम हो जाती है और बहुत ही कम तापमान पर श्वसन की दर नगण्य हो जाती है। श्वसन के लिए आदर्श तापमान 20 - 30oC है।

●       कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता: कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता जितना ज्यादा होती है श्वसन की दर उतनी ही कम होती है।

●       कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता में वृद्धि और आक्सीजन के अभाव में एरोबिक श्वसन की दर प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है।

●       पानी: श्वसन करने वाले जीव में पानी की मात्रा में वृद्धि के साथ श्वसन की दर बढ़ जाती है।

●       प्रकाश: प्रकाश जीव का तापमान बढ़ाकर श्वसन को नियंत्रित करता है।

पौधों में श्वसन का अध्ययन अंकुरित हो रहे नम बीजों में किया जा सकता है। श्वसन के दौरान ये कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) मुक्त  करते हैं। बीज हवा में तंग शंक्वाकार फ्लास्क में रखे जाते हैं। पोटेशियम हाइड्राक्साइड (KOH) साल्यूशन युक्त एक छोटा सा टेस्ट ट्यूब फ्लास्क में रखा जाता है। पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड बीजों द्वारा छोड़ा जाने वाला कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर लेता है और फलस्वरूप फ्लास्क में आंशिक वैक्यूम बन जाता है। इससे डिलीवरी ट्यूब में पानी का स्तर बढ़ जाता है। इस प्रकार बीकर में डूबे डिलीवरी ट्यूब के अंत में जल स्तर में वृद्धि सिद्ध करती है कि अंकुरित हो रहे बीज श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करते हैं। चने और सेम के बीज के मामले में जल स्तर में वृद्धि अपेक्षाकृत कम होती है क्योंकि ये बीज श्वसन सब्सट्रेट के रूप में वसा और प्रोटीन का उपयोग करते हैं और बहुत कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। लेकिन गेहूं के अनाज के मामले में जल स्तर में वृद्धि ज्यादा होती है क्योंकि यह श्वसन सब्सट्रेट के रूप में कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करता है।

सीखने के परिणाम:

1. छात्र श्वसन और श्वसन भागफल शब्द समझते हैं।

2. छात्र विभिन्न श्वसन पदार्थों पर श्वसन भागफल की निर्भरता को समझते हैं।

3. छात्र श्वसन की दर को प्रभावित करने वाले कारकों को समझते हैं।

4. छात्र एनीमेशन और सिमुलेशन के माध्यम से गुजरकर वास्तविक प्रयोगशाला में बेहतर प्रयोग करते हैं.

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